STORYMIRROR

Kumar Kishan

Children Stories

3  

Kumar Kishan

Children Stories

उठो प्यारे लाल(बाल कविता)

उठो प्यारे लाल(बाल कविता)

1 min
375

उठो प्यारे लाल

अब सुबह हो चुकी है

पंछियां चहचहा रही हैं

अब उठो प्यारे लाल

देखो प्यारी-प्यारी किरणें

जग को सुंदर बना रही हैं।


आलस त्याग कर सारे

काम पर जा चुके हैं

उठो प्यारे लाल

अब सुबह हो चुकी है

मुर्गा बांग दे चुका है।


कोयल रानी कुक रही है

कलियाँ सब खिल चुकी हैं

अब,तुम भी आलस त्यागों

उठो प्यारे लाल

अब सुबह हो चुकी है।


Rate this content
Log in