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Vijay Kumar parashar "साखी"

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Vijay Kumar parashar "साखी"

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तुझबिन मेरा सफर

तुझबिन मेरा सफर

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तुझ बिन मेरा सफर न होगा

पत्थर से बना मेरा घर न होगा।

कर रहा है ये मेरा दिल पुकार

आजा तू पास ओ मेरे दिलदार।

तुझ बिन ये दिल जिंदा न होगा

मेरी रोशनी की किरण तू ही है।

तुझ बिन मेरे जीवन में उजाला न होगा

यूं तो सांसें आएंगी जाएंगी।

तेरे बिना ये दिल,दिल न होगा।

केवल यह लुहार की धौंकनी होगा।

तू मेरा साथ चाहे तन से

या फ़िर धन से न दे,

पर तुम्हारा दिल तो मेरे संग होगा।

करूँगा तेरा इंतज़ार आखरी सांस तक

भले तेरी नफरत में मेरा नाम होगा।

मैं तो दिलजला हूं दिलजला ही रहूँगा

पर तेरे दिल मे कुछ तो मेरा प्यार होगा।

जब तुम दुनियां से परेशां हो जाओ

तुम मेरे पास चले आना

जवानी क्या बुढ़ापे में भी

मेरा प्यार कम न होगा।



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