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minni mishra

Others

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minni mishra

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तेर रूप अनेक

तेर रूप अनेक

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नारी, तुम श्रद्धा भी, समर्पण भी,

हमारे अंतस का दर्पण भी,

तुम काली भी, कल्याणी भी,

सती रूप अनुसुइया भी।

तुम पूतना भी, तुम कैकेयी भी,

तो, कहीं माता रूप कौशल्या भी,

कभी अंतरिक्ष की कल्पना बन जाती,

तो, बगिया की तुलसी बन लहराती।

कभी इंदिरा भी, कभी फूलन भी,

कभी श्रापित होकर, तुम पत्थर कहलाती,

कहीं, यशोदा बन, ममता लहराती,

तो, कभी दानी बनकर अन्नपूर्णा कहलाती।

हाँ ..कहीं, वासना की शकुन्तला बन जाती,

पर, जब कभी आकुल मन की राधा बनती,

तो, तुम ही... युगश्रेष्ठ... विजयश्री को पाती।


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