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Archana Verma

Others

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Archana Verma

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ताबीर

ताबीर

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महज़ ख़्वाब देखने से उसकी ताबीर नहीं होती 

ज़िन्दगी हादसों की मोहताज हुआ करती है ..

बहुत कुछ दे कर, एक झटके में छीन लेती है 

कभी कभी बड़ी बेरहम हुआ करती है …

नहीं चलता है किसी का बस इस पर 

ये सिर्फ अपनी धुन में रहा करती है ..

न इतराने देगी तुम्हें ये, अपनी शख्सियत पे 

बड़े बड़ों को घुटनों पे ला खड़ा करती है ….

खुद को सिपहसलार समझ लो, इसे जीने के ख़ातिर 

ये हर रोज़ एक नयी जंग का आगाज़ करती है ……



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