STORYMIRROR

बेज़ुबानशायर 143

Inspirational

5  

बेज़ुबानशायर 143

Inspirational

स्वामी विवेकानन्द

स्वामी विवेकानन्द

1 min
444


सागर को गागर में भरते

महान संत स्वामी की गाथा

शब्दों में अलंकृत कर माला

गाथा को पंक्तियों में सजाते


१२ जनवरी सन् १८६३ को जन्में

वीरेश्र्वर शिव के अनुग्रह से 

पिता विश्वनाथ दत्तमाता भुवनेश्वरी देवी

असाधरण मेघा,तेजस्विता,साहस


स्वाधीन मनोभाव,सहृदयता,बंधु प्रीति

खेल कूद के प्रति आकर्षक,

प्रबल आध्यात्मिक तृष्णा

शयन पूर्व ज्योति दर्शन नित्य,


शास्त्रीय भजन संगीत ,गायक,

कुशल अभिनेता, मातृपितृ भक्त बालक 

अल्प अवस्था में पुस्तकों का अध्ययन

गहन गंभीर चिंतन शक्ति जागी उनमें,


गुरु श्री रामकृष्ण को उन्होंने स्वीकारा

जिन्होंने उनके एक प्रश्न पर ईश्वर से मिलाया

गुरु वचनों का अमल किया जीवनपर्यंत

जीव पर दया नहीं शिव भाव से


सबके जीवन की सेवा है करनी

श्रीरामकृष्ण सूत्र है स्वामी जी उनके भाष्य

वराहनगर में रामकृष्ण मठ की स्थापना

नरेंद्रनाथ ने अल्प आयु में हुए सन्यासी


विविदिषानन्द,सच्चिदानंद, विवेकानन्द

आत्मगोपन हेतु विविध नाम धारे

शिकागो विश्वधर्म महासभा में स्वामी

विवेकानंद नाम से आविर्भूत हुए


संन्यास लिया जब परिव्राजक रूप में

समय समय पर करते थे चहुंओर भ्रमण

देशवासियों के मन में जाग्रत करा था

आत्मविश्वास आत्ममर्यादा,आत्मगरिमा


भावों का संचार देश भक्ति का

अल्प आयु में ले ली थी उन्होंने महासमाधि

अन्त समय उनके वचनामृत थे

"पुराने वस्त्र त्याग बाहर आयेंगे


काम से कभी निरत न होऊंगा

मानव को अनु प्रेरित करता रहूंगा

मानव को समझनाहोगा वह खुद भगवान"

वे ही थे भारतीय राजनीतिक,सांस्कृतिक

 आध्यात्मिक स्वाधीनता संग्राम जनक!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational