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बेज़ुबानशायर 143

Children Stories Inspirational

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बेज़ुबानशायर 143

Children Stories Inspirational

आज की कविता बता रही है आज एक इतिहास पुराना ।

आज की कविता बता रही है आज एक इतिहास पुराना ।

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आज की कविता बता रही है

आज एक इतिहास पुराना।

गढ़ा जिसे था अंग्रेज़ों ने

अंधों ने उसको सच माना।।


एक लालची विश्वविजेता

बनने का भूखा हैवान।

नाम सिकंदर था उसका वह

आ पहुँचा था हिंदुस्तान।।


राजा पुरु ने पकड़ा उसको

पूछा बोल मरेगा कैसे।

बना चुकंदर घिघियाया फिर

मत मारो ऐसे या वैसे।।


मैं भी राजा तुम भी राजा

मुझको राजा माफ़ करो।

मैं यूनान लौट जाऊँगा

ऐसा कुछ इंसाफ़ करो।।


पुरु ने दयाभाव अपनाकर

लौटाया उसको यूनान।

उल्टी मगर कहानी रचकर

बना सिकंदर स्वयं महान।।


जा स्वदेश यह गढ़ी कहानी

मैं पोरस से जीता था।

कैसे कह देता घर जाकर

मैं चूहा वह चीता था।।


हाँ इतिहास हमारा लिखने

वाले भी तो लुटेरे थे।

क्रांतिकारियों से पिट-पिटकर

लौटे अपने डेरे थे।।


जिनको शासन देकर लौटे

वे भी थे आधे अंग्रेज़।

गोल-मोल उनके भी किस्से

गोल-गोल थी उनकी मेज़।।


फूट डालकर करो राज की

नीति तब भी जारी थी।

अंग्रेज़ी इतिहास लिखात़ी

ऐसी सरकार हमारी थी।।

बालमित्र यह परम सत्य है

लोभ लाभ से बढ़ता है।

कोई लुटेरा छोड़े लालच

झूठ सिकंदर बकता है।।


अपने गौरव को पहचानो

जागो-जागो हिंदुस्तान।

नहीं सिकंदर या कोइ अकबर

पुरु-प्रताप थे वीर महान।।


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