STORYMIRROR

Dhvani Ameta

Others

4  

Dhvani Ameta

Others

श्री राम

श्री राम

1 min
394

तीव्र वृंद, दीप्ति गेह,

रूप ,तुंग, रम्य देह

छिद्र छिद्र महावीर 

आशीष मांगती हूं मैं

अपनी ही लगन, बल 

आपसे आसक्ति दो,

उन्नति, अभंग, इंकलाब 

मांगती हूं मैं

मार, कोह , मान आदि

जो भी है विषाक्त तत्व

चिंता, कुड , रोग से परित्राण

मांगती हूं मैं,

अहिंसा के निधान,

सत्य महावीर महान,

महावीर दया का वरदान 

मांगती हूं मैं।


Rate this content
Log in