सावन पहली फुहार तेरी
सावन पहली फुहार तेरी
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देखो! सावन नयी बूंदों का आगाज लेकर आया।
जिसे देख चहूँ ओर, रंगीन फिजा ने हाथ बढ़ाया।।
सब मौसम का धुंधलापन छट जाएगा अब।
ए सावन! तेरी पहली फुहारों से, फिजा में रंग बंट जाएगा सब।।
नयी फुहारों का प्यार, बन कर बरस आया।
घृणा, नफरत को भी, अब तुझ पर प्यार आया।।
बदल दे तू हुस्न अब, माहौल गमगीन का।
अब प्रेम वाला ही रूप दिखे, फिजा रंगीन का।।
शुक्र है तुझे कुछ तो तरस आया, इस धरती की प्यास पर।
अबकी खरा उतर जाना, बस तू इसकी आस पर।।
ए सावन! तेरी फुहार से जागे सब सोए सपने।
तेरी बूंदों के स्पर्श से, क्यूँ याद आ जाये सब अपने।।
