STORYMIRROR

Gaurav Shukla

Others

2  

Gaurav Shukla

Others

रे सखी

रे सखी

1 min
197

रे सखी,

मैं बसंत बन जाऊँ,

किसानों के खेतों सा

मैं लहलहाऊँ,

झूम उठे मन बावरा,

गीत मीत का गाऊँ..


चलो पगडंडियों से,

पद चिन्ह देख कर आऊँ,

ऋतुराज,

हे बसन्त बहार...

सावन से इठलाऊँ...

धरा धरा रह जाए आज,

बस पंछी सी मैं उड़ जाऊँ।



Rate this content
Log in