पुरवाई..!
पुरवाई..!
1 min
213
पवन की सर्द पुरवाई हो
झरने की मधुर आवाज़
टहनियों से पत्ते गिरते
बहते मधुर फूलों से सुगंध
स्वर्ग से अप्सरायें आतीं
धरती को करने मलंग
सुंदर मोहक दृश्य बनातीं
बना आसमान में रंगीन तरंग
दुल्हन सी सुंदर बनाती
प्रेम के सारे रंग भर जातीं
ख़ुशियों का बहार लातीं
बसंत का त्योहार लातीं
