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RASHI SRIVASTAVA

Others

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RASHI SRIVASTAVA

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प्रिय रचना

प्रिय रचना

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हर रचना मुझे अपनी बेटी जैसी लगती है,

फिर भी "बेटी" पे लिखी कविता, मुझे काफी अच्छी लगती है।


बैठे बैठे लिख दी थी बस, क्योंकि झूठ नहीं था कुछ

बेटी के जज़्बात लिखे, लाग लपेट नहीं था कुछI


हर लड़की का छू जाती दिल, जैसे उसकी ही कहानी हो

वही गीत मैं गाती हूं, जब प्रिय रचना सुनानी हो I



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