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Shweta Chaturvedi

Inspirational


5.0  

Shweta Chaturvedi

Inspirational


पंक्षी उड़ चला

पंक्षी उड़ चला

1 min 87 1 min 87

है अभी उजाला 

जहाँ चाहा उस डाल पे ठहरा 

फैलाए पंख आनंद के 

विचारा अनंत नील गगन में

 

हरितम प्रकृति के झूलो में झूला 

पर सताती तो होगी

उसी घरौंदे की याद 

जहाँ बंधी उसके हृदय की डोर


वियोग करता तो होगा विचलित 

जहाँ छूटा उसका सबकुछ

जहाँ उसका बसेरा 

तन स्वाधीन, मन बंधनतम 


साध अपना गन्तव्य

वो फिर से आगे बढ़ा 

पंक्षी उड़ चला 

कि कहीं साँझ ढल ना जाए... 


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