निर्भया को न्याय मिला
निर्भया को न्याय मिला
एक हुआ किस्सा तमाम जो,
सबके मन को भाया है।
दुराचारियों हत्यारों को ,
फाँसी पर लटकाया है ।।
नाम निर्भया था जिसका वो,
दुराचार की मारी थी।
दानवता से मानवता भी,
उस दिन देखो हारी थी ।।
तार तार इज़्ज़त की चुनर,
करने वाले हँसते थे।
स्याह रात में नाग विषेले,
काले उसको ड़सते थे।।
अबला बेबस थी तब लोगों,
असर हुआ अब आहों का।
रक्तिम सुबह हुई पर बदला,
आहों को मिल पाया है।।
एक हुआ किस्सा तमाम जो,
सबके मन को भाया है।
दुराचारियों हत्यारों को,
फाँसी पर लटकाया है ।।
न्याय बीस मार्च बीस को,
शुक्रवार के दिन आया।
सभी दोषियों को कानूनन,
जब फांसी पर लटकाया।।
हुई न्याय की विजय दिशाएं,
दसों बहुत ही हर्षायी।
एक बेटी के मात पिता को,
जिसने राहत पहुंचायी।।
हर अपराधी सहमें ऐसा ,
ही इंसाफ जरूरी था।
हुई भौर रोशन आनंदित,
होकर अर्ध्य चढ़ाया है ।।
एक हुआ किस्सा तमाम जो,
सबके मन को भाया है।
दुराचारियों हत्यारों को,
फांसी पर लटकाया है ।।
"अनंत" हो निर्भया या कोई,
बेटी नहीं छली जाए ।
बेटी का सम्मान करें हम ,
निर्भय वो नाचे गाए ।।
प्यार मिले परिवार सरीखा,
जहाँ रहे सुखपान करे।
बनकर रहे सिंहनी जैसी ,
जनक सदा अभिमान करे।।
न निगाहें बद छुए कभी भी,
छेड़छाड़ न करे।
यही फैसले का दर्शन है ,
जनमत को समझाया है ।।
एक हुआ किस्सा तमाम जो,
सबके मन को भाया है।
दुराचारियों हत्यारों को ,
फाँसी पर लटकाया है ।।
