मतलब में
मतलब में
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मतलब में
रिश्ता गहरा
बन जाता है
इतना गहरा कि
कुछ और ना
नजर आता है।
खून के रिश्ते
भी फीके पड़
जाते हैं वे आपस
में ऐसे जुड़ जाते हैं
कि देखने वाले भी
चकरा जाते हैं।
परवाह से लेकर
प्यार सब कुछ
बेहिसाब मिल जाता है
जो कुछ पल का होता
जो मतलब निकलते ही
ताश के महल की तरह
बिखर जाता है।
पर कोई समझता ही नहीं
सब भी मतलबी हैं
इसलिये किसी को बुरा भी
नहीं लगता,
बस ऐसे ही चल रही है
कलयुग की दुनिया
मतलब में।
