मन का राजा
मन का राजा
मैं हूँ अपने मन का राजा
जो जी में आये करता हूँ।
सुनता हूँ मैं अपने दिल की
नहीं किसी से डरता हूँ।
मेरी मर्ज़ी जब चाहें मैं
सो कर के उठता हूँ।
दिन भर चाहूँ तो आलस
में समय गंवाता हूँ।
मैं हूँ अपने मन का राजा
जो जी में आये करता हूँ।
पर रोना इस बात का है
मैं हर दम सोचा करता हूँ
है क्या वजह आख़िर क्यों
कोई काम न पूरा करता हूँ।
एक दिन लगा सोचने मैं
दिन भर क्या क्या करता हूँ।
पता लगा समय यूँ ही बेवजह
बेकार ही जाया करता हूँ।
तब समझ आयी मुझको ये बात
मैं वक़्त बर्बाद करता हूँ।
मैं हूँ अपने मन का राजा
जो जी में आये करता हूँ।
वक़्त का मोल समझेगा जो भी
उसको मैं वादा करता हूँ।
वक़्त उसी का साथी है जो
वक़्त की कद्र करता है।
