STORYMIRROR

Shalini Kumari

Others

3  

Shalini Kumari

Others

मिलती मुझे हार है

मिलती मुझे हार है

1 min
166

ऐसे ही जो, हार मिले,

क्या मैं आगे, बढ़ पाऊंगी।

असफलताओं के बोझ से,

कब ऊपर, उठ पाऊंगी।

हर दिन मैं, खुद को तैयार करती,

कामयाबी की, आशा करती।

अपने मन को, हर दिन समझाती 

पर मिलती मुझे, हार है।

कभी कभी लगता है अब यूं,

जीना मेरा बेकार है।।



Rate this content
Log in