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Shalini Kumari

Others

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Shalini Kumari

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हरा फिर से

हरा फिर से

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प्रकृति का रूप,

माता में समाया है।

हर कण कण में बसी,

माता की ही छाया है।

उनके इस रूप के दर्शन,

हम हर दिन करते हैं।

नवरात्रि में तो बस हम,

उनका ही सुमिरन करते हैं।।


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