महान है औरत
महान है औरत
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फक़त जिस्म नहीं इक जान है औरत
मर्द माने या न माने, महान है औरत।
शोख़, चंचला, खूबसूरत सी एक बला
गर बेहद हसीन और जवान है औरत।
दादी, नानी, माँ, बहन, बेटी हो या बीवी
घर और परिवार की कमान है औरत।
हिम्मत, मेहनत, इज्ज़त की प्रतिमूर्ति
धीरज, धर्म और घर की शान है औरत।
मजहब, दीन, ईमान, इबादत ओ खिदमत
रामयण, गीता, बाईबल व कुरान है औरत
