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Bhawna Kukreti Pandey

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Bhawna Kukreti Pandey

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मेरी पहचान

मेरी पहचान

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मैं ज्योति विकल

ज्योतिपुंज से निकली

उसी मे पुन: समाने को।


भाव, जीवन में जीने उतरी,

अनुभव का अमृत पाने को।

मरीचिका माया की प्रतिपल,

छले मनस देह मुरझाने को ।


सत्य हुआ जब से उद्भासित,

मस्तिष्क लगा झुठलाने को।

भाग बडा, हुई कृपा अनंता

अमूर्त वचन समझाने को।


अनवरत जन्म, नवल भूमिका,

हैं सुपथ शिव मे मिल जाने को।  



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