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सरफिरा लेखक सनातनी

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सरफिरा लेखक सनातनी

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मेरी कहानी सुन रोए

मेरी कहानी सुन रोए

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कभी रूठ कर सो गए हम

कभी रात भर ना सोए। 


कभी हंस के गम छुपाया

कभी मुंह छुपा कर रोए। 


मेरे पुराने दर्द को किरोध कर रोए 

मुझे अपना कहने वाले वो मेरे लिए रोए। 


रोए इतना किसी की याद में

फिर मेरी कहानी सुन रोए।



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