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SANDIP SINGH

Children Stories

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SANDIP SINGH

Children Stories

मेरे बाबा

मेरे बाबा

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जिन की गोदी में खेला,

मैं वह थे मेरे बाबा प्यारे।

संस्कारों की देन वही थे,

घर भर के सबके वे प्यारे।


बच्चा बन मेरे संग खेले,

खिलाते थे नित्य निवाले।

बाबा का मैं रहा दुलारा,

बाबा रुप प्रभु अवतारा।


एकता की मिसाल थे बाबा,

मेरे अच्छे मीत थे बाबा।

मेरे गीत संगीत थे बाबा, 

मेरे मंदिर काशी काबा।


पालक हार थे मेरे बाबा,

खेवन हार हैं मेरे बाबा।

मुझको राह दिखाते बाबा,

 मेरे तो भगवान हैं बाबा।


सुबह शाम की आरती मेरी, 

बाबा के चरणों में अर्पित।

श्रद्धा के मोती वह मेरे,

मन के भाव उन्हें समर्पित।



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