मेंहदी
मेंहदी
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मेंहदी उसकी लग रही होगी
डोली उसकी सज रही होगी।।
खूब बचपन में खेली वो जिस घर
वो विदा घर से हो रही होगी।।
बाप माँ और अब बहन रोती
अश्क़ वो भी छिपा रही होगी।।
भाई के साथ खूब खेली जो
छोड़ के साथ जा रही होगी।।
लाड़ नाज़ों से उसको है पाला
कोने में वो भी रो रही होगी।।
साथ रहता है उम्र भर जिसका
साथ उसका निभा रही होगी।।
होती रौनक है उनसे अब आकिब
तुम्हें बरकत भी मिल रही होगी।
