STORYMIRROR

माना वक़्त बुरा है तो मर जाएँ

माना वक़्त बुरा है तो मर जाएँ

1 min
313


माना वक़्त बुरा है तो मर जाएँ क्या

अपनी ही निगाहों से उतर जाएँ क्या


हर चीज़ मेंरे मुताबिक हो,जरूरी तो नहीं

इतने से ग़म में जाँ से गुज़र जाएँ क्या


मैंने जीने का वायदा किया है किसी से

मौत को देख वायदे से मुकर जाएँ क्या


फूल की तरह खिलने का माद्दा है मुझमें

बेकार ही तूफाँ में पत्तियों सा बिखर जाएँ क्या


अभी तो पाँव जमाए हैं मेरी हसरतों ने

कोई कुछ कहे तो जड़ से उखड़ जाएँ क्या



Rate this content
Log in