STORYMIRROR

Shah Talib Ahmed

Others

2  

Shah Talib Ahmed

Others

माँ की ममता

माँ की ममता

1 min
98

मेरी हरारत को भी वो बुखार समझती है।

ज़रा सी आवाज़ तेज़ हो जाये तो वो खार समझती है।


मैं कितनी भी तमीज़ से पेश आऊँ वो सब बेकार समझती है।

जब तक उनके रुख़सारों को ना चूमो कहाँ वो प्यार समझती है।


Rate this content
Log in