माँ का प्यार
माँ का प्यार
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माँ का प्यार,
अद्भुत, अविश्वसनीय और अपरंपार।
इसके जैसा संसार में, न कोई और दूजा।
न होता इसके प्यार में परिवर्तन,
जन करते है इसका विवर्तन।
अपने कुनबे के लिए करती संग्राम निरंतर,
विपदा आने पर ना आने देती उन पर कोई कहर।
समेट लेती सारे दुखों को अपने अंदर,
उस समय, उससे बड़ा ना होता भवसागर का समुंदर।
लाख गलतियाँ करने के बाद भी जो अपनाएँ और प्यार करें,
आओ ऐसी निष्ठावान, कर्तव्ययी तथा पूजनीय माँ को कोटि-कोटि प्रणाम करें।
