कली
कली
1 min
395
मै कली हूं मुझे पूरी तरह खिलने तो दो।
फूल बनकर खुशबू को बिछड़ने तो दो
क्यों दूर लेते हो तुम मुझे कच्ची उम्र में।
मुझे मेरी जिंदगी जीने का अवसर तो दो ।।
कुछ क्षण की खुशबओ के लिए मेरी जिंदगी खराब करते हो।
अपनी चाहत के लिए तुम हमें क्यों बर्बाद करते हो।
मैं कल ही हूं इसमें मेरी खता क्या है यह बताओ तो सही।
बिखेर दूंगी खुशबू मैं सारे जहां में मुझे फूल बने दो तो सही।
मुझे भी अपनी जिंदगी को खुशी से जी लेने दो।
मेरी भी अरमा है दिल में उसे पूरा होने दो।
चाह नहीं है हमें किसी की मुकुट की शोभा बनने की।
चाहत है तो बस इतनी सी चरणों में ही रहने की।।
