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Deepak Singh

Children Stories

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Deepak Singh

Children Stories

बचपन

बचपन

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बचपन के वो दिन अब मुझसे बहुत दूर है चला गया,

हम तो बस यादें ही हैं पर बचपन अब तो चला गया।


मां की लोरी कि वह गायन सुनने को अब तरस गया,

गोदी में लिपटा रहना और हाथ से आंचल छूट गया।


बचपन के वह दिन अब मुझसे बहुत दूर है चला गया।

मां के हाथ का दूध भात तो खाने को अब तरस गया।


पीछे -पीछे खाना लेके, मां का भागना अब छुट गया।

बचपन की तीनपहीया गाड़ी, लगता है अब टुट गया।


बचपन के वो दिन अब मुझसे बहुत दूर है चला गया।


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