Om Prakash Fulara
Others
लड़ना मुझे भी आता है
जीतना मुझे भी आता है
पर लड़ूँ किससे
आस पास सब अपने ही हैं
इनसे लड़ के
इनसे जीतकर
क्या मिल पाएगा
सुकून मुझे
इनसे हारने में जो आनंद है
वह जीत नहीं
इसीलिए रहता हूँ खामोश
देखता हूँ इनकी जीत
कोई तो है
जो बढ़ रहा है आगे।
आँधी
गजल
पतझड़
वात्सल्य
संघर्ष
हिंदी
नारी
चम्पकमाला छन्...
डरो ना
आत्मचिंतन