STORYMIRROR

bimlesh rai

Others

4  

bimlesh rai

Others

जिंदगी

जिंदगी

1 min
293

आह! सी इक थकी शाम है जिंदगी 

अंततः एक विश्राम है जिंदगी 

जीके देखा जो हमने तो ऐसा लगा 

दर्द का दूसरा नाम है जिंदगी ।

सांस की पालकी में दुल्हन सी सजी 

मौत का एक पैगाम है जिंदगी 

वक्त बेवक्त की ठोकरौ से परेशान 

इक छलकता हुआ जान है जिंदगी ।

अर्थ के भव्य पटल पर टंगी 

श्वेत है तो कभी श्याम है जिंदगी 

खोज में स्वर्ग मृग की भटकती 

अतृप्त इच्छाओं का नाम है जिंदगी ।

कुछ नेक और कुछ बदनाम है जिंदगी ।।

      



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from bimlesh rai

बेटी

बेटी

1 min पढ़ें

जीवन

जीवन

1 min पढ़ें

नारी

नारी

1 min पढ़ें

सीमा

सीमा

1 min पढ़ें

बचपन

बचपन

1 min पढ़ें

बचपन

बचपन

1 min पढ़ें

बचपन

बचपन

1 min पढ़ें