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Surekha Navratna

Others

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Surekha Navratna

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जिंदगी को हंसकर जीना भी....

जिंदगी को हंसकर जीना भी....

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तनावग्रस्त जीवन आजकल हर किसी की बीमारी है, 

जिंदगी को हंसकर जीना भी बड़ी कलाकारी है...


आसां नहीं मुश्किलों को दरकिनार कर आगे बढ़ जाना, 

हर उलझनों को सुलझा लेना भी अच्छी अदाकारी है... 


ख़्वाहिशें अधूरी रह जाए तो तकलीफ हुआ करती है, 

फ़ेहरिस्त सीमित हो इच्छाओं की इसी में समझदारी है... 


माना ज़िद पूरी करने घर से दूर...तो जाना पड़ता है, 

बुजुर्गों को अकेले छोड़ देना भी तो एक तरह से गद्दारी है... 


नुमाइशों के फ़िराक़ में लोग बहुत कुछ गंवा देते हैं, 

पहले अपने आप को खुश रखो बाद में दुनियादारी है... 



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