जिंदगी के मोड , लेखक भरथ शर्मा
जिंदगी के मोड , लेखक भरथ शर्मा
ज़िंदगी उस मोड़ पर है, जहाँ हम पूछ सकते हैं – क्या?
ये ज़िंदगी बस एक सफ़र है, या हम इसमें डूब सकते हैं -क्या?
उस पल कुछ ऐसा हुआ, जब हम अकेले ही चल दिए, वो एक किनारा था, जिस पर हमारे कदम बढ़ दिए।
ज़िंदगी फिर उसी मोड़ पर है, जहाँ हम पूछ सकते हैं क्या?
तुम साथ चलोगे क्या? तब तक हम कहाँ और तुम कहाँ? तुम भी एक ओर चल दिए, और हम भी एक ओर बढ़ गए, तो फिर इस रास्ते पर आगे होना ही क्या?
तुमने कुछ अलग सा कर दिया है इस सफ़र में, अभी साथ नहीं तुम, पर शामिल हो हर याद में। मैं आज भी ठहर गया हूँ उसी वक़्त के पहर में, जहाँ दिल फिर से रुक कर पूछता है – क्या?
क्या बात होती है जब ये तन्हा दिल रोता है? उस रात मेरी तरह, क्या कोई और भी जागता है? ये बातें कैसी हैं, और दिल का ये झुकाव कैसा है?
हम जो चुप रहकर कहते हैं, क्या वो तुम सुनती हो?
ज़िंदगी आज भी उसी मोड़ पर खड़ी है, जहाँ हम बस यही पूछ सकते हैं - क्या?
लेखक ,,,भरथ शर्मा
