पहला अनुभव। लेखक ,,भरथ शर्मा
पहला अनुभव। लेखक ,,भरथ शर्मा
उम्र है सत्रह की, पर दिल तो बड़ा रखते हैं, नादानी के इस दौर में भी, ज़रा समझदारी रखते हैं।
जब बात अपनी आन और सम्मान पर आती है, तब धड़कनें रोती हैं, और साँसें भी थम सी जाती हैं।
जब भी हम सोचकर आगे कदम बढ़ाते हैं, कि चलो जो हुआ सो हुआ, खुद को यह समझाते हैं।
पर जब फिर से वही पुरानी बात होती है, दिल की गहरी परतों में एक नई शुरुआत होती है।
दिल की जिन बातों को हम भुला ना सके, वो दिल फिर भला किस काम का?
जो मनुष्य अपने आप को संभाल ना सके, वो जीवन फिर भला किस काम का?
हर इंसान को हर समय कुछ कहना और सुनना पड़ता है, ज़िंदगी की इस कशमकश में बहुत कुछ सहना पड़ता है।
पर वो इंसान भी कमाल का होता है दोस्तों, जो ना किसी से अपनी तकलीफ़ कहता है, और ना ही अंदर ही अंदर घुटता रहता है।
उम्र भले ही सत्रह की है, पर दिल तो बड़ा रखते हैं, बात किसी की भी हो, दिल तो बड़ा रखते हैं।
लेखक ,,भरथ शर्मा
क्षक्षक्षकक्षा 12 उम्र 17 साल
