STORYMIRROR

Afsana Wahid writes Wahid

Others

3  

Afsana Wahid writes Wahid

Others

जि़दगी

जि़दगी

3 mins
232

जिंदगी किस राह पर चल दी है तू

मुझे हर पल बदल रही है तू।

तुझसे है नाता मेरा बहुत पुराना

फिर भी इस तरह क्यों बदल रही है तू।

ए जिंदगी मुझको पल पल बहुत तड़पाने लगी है तू

हर दर्द और दुख का एहसास दिलाने लगी है तू

फिर भी साथ चलना है मुझे तेरे

हर दुख से रूबरू कराने लगी है तू।

हर कदम साथ में रहती है मेरे तू

हर लम्हा कुछ नया सिखाती रहती है मुझे तू

तुझ से दूरी भी बर्दाश्त नहीं है मुझे

क्या-क्या नए रूप दिखाती है मुझे तू।

ए जिंदगी कभी कभी कितनी खुशियां लाती है तू

हमें कितना बहलाती है तू

कुछ पल तू बहुत अच्छी लगती है हमको

जिस पल में हर पल खुशियां दिलाती है तू ।

ए जिंदगी जीने में दर्द देती है बहुत तू

हर दर्द का एहसास कराती है बहुत तू

तुझे जीना भी जरूरी है इसलिए

हमें सताती है बहुत तू

यू दर-दर भटके तेरी चाहत में हम इसी चाहत से हमें अपना बनाती है तू।

वाकिफ रहती है हर शय से हरदम तू

वक्त वक्त की तेज चलने की रफ्तार को पहचानती है तू

गाफिल नहीं हम तुझसे फिर भी ना जाने एक दिन मुंह मोड़ जाती है तू।

खुशी से जीना चाहता है हर शख्स तुझे

मगर जीना पाता है क्योंकि बहुत जालिम है तू

हर उम्मीद होती है तुझसे जुड़ी हमारी

फिर भी समझ कर भी नहीं समझना चाहती है तू।

ए जिंदगी एक ऐसा खेल है निराला तेरा

हर चाहने वाला है दीवाना तेरा

गमों से भरी होती है तेरी तहरीर फिर भी

लोग फिर भी तेरी ख्वाहिश करते हैं इतनी बेवफा क्यों है तू।

जब जब जीने की आस खत्म हो जाती है

उस मोड़ पर तू हमें नई खुशियां दे जाती है

ए जिंदगी तेरा अंदाज भी निराला है

हर गम में खुशियां देखकर हंसाना तेरा खेल पुराना है।

जब जब हम गम में डूब कर बेज़ार

र होने लगते हैं

ए जिंदगी तू हमसे फिर से दो-चार होने लगती है

यही तो तेरी दुनिया का खेल निराला है

हर एक शख्स इसमें खोकर जीने वाला है

जब हम जीना नहीं चाहते तो बहुत प्यार से हाथ पकड़ती है हमारा तू।

ए जिंदगी एक ज्वारी की मानिंद है तू

कोई तो तुझे जीत कर भी हार जाता है

और किसी को तो हराकर भी जीता देती है

तेरी दुनिया की सब दांवपेच से वाकिफ नहीं है हम

पता नहीं कब शय पे पर मात देकर चली जाओ तुम।

कभी कभी तुझसे हम इंसान इतना परेशान हो जाते हैं

अपने बुरे हालात पर ही लाचार हो जाते हैं

तू उस पल बहुत बेजार लगती है हमें

उस पल जीने की राह से भी हम दूर चले जाते हैं।

जब आती है तू उम्मीद की नई किरण लेकर फिर से

उस पल फिर से जीने की उमंग जागती है हम में

तेरी हर उम्मीद से हमारी सांसे चलती है

तेरी हर उम्मीद से हमारी खुशियां ढलती है

इतनी बेवफा क्यों है ए जिंदगी तू

जो जीना चाहता है उसको छोड़ कर चली जाती है तू

तेरी बेवफाई का कोई गम नहीं है

क्योंकि तू किसी की भी महबूब नहीं है

कैसे वफा की उम्मीद करें तुझसे जिंदगी

तू अपनी तो है फिर भी साथ नहीं है!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन