जगत के नाथ जगन्नाथ
जगत के नाथ जगन्नाथ
1 min
161
रूप उसका है सबसे निराला,
आपरम्पार है उसकी हर एक लीला।
कहीं ना होके भी वह हर जगह है होता,
आकार होके भी वह निराकार है होता।
हाथ ना होके भी वह सबसे बलवान है होता,
बिन पैर के भी वह पूरा संसार है चलाता।
जिसकी आँखो में पूरा जग है बसता,
जिसकी एक झलक से हर पाप है धुलता।
वही तो भक्तों का भगवान है कहलाता,
संसार उसे जगत के नाथ जगन्नाथ है बुलाता।
