STORYMIRROR

Tera Sukhi

Others

4  

Tera Sukhi

Others

जानते तो थे

जानते तो थे

1 min
216

जानते तो थे उसे पर अनजान बने रहे

वो जान के दुश्मन थे जो जान बने रहे 


आस्तीन में आये थे साँप कुछ मेरी भी 

वही मरते दम तक  खानदान बने रहे


हम वीरान सहरा बने जिनकी यादों में

वही खिले गुलाबों के गुलस्तान बने रहे


दो गज़ ज़मीं न हुई नसीब मरते वख्त

ओर वो ताउम्र ऊँचे आसमान बने रहे 


शजर टूटे आंगन के सब परिंदे उजड़े

वो उजड़े परिंदे उसके मेहमान बने रहे  


वो जुगनू उड़ते हुए सारे किए गए कैद 

वो शिकारी उजालों के नादान बने रहे 


ईमान बेचकर सुख भला क्या चैन पाया 

जहाँ सब साँस भी तेरे बईमान बने रहे 



Rate this content
Log in