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Abdul Qadir

Others

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Abdul Qadir

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इन्सान और धर्म

इन्सान और धर्म

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जंग का आगाज एक जलती मशाल है।

 बेहतर को मौत देना कैसा कमाल है।


 धर्म का झगड़ा कभी मिटता नहीं यारों।

 आस्था से खेलना गधों की इक चाल है।


 अच्छा है जानवरों का कोई धर्म नहीं है।

 ये तो बस इंसानों में एक माया जाल है।


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