होता अगर रिमोट कंट्रोल ज़िंदगी का भी
होता अगर रिमोट कंट्रोल ज़िंदगी का भी
होता अगर रिमोट कंट्रोल ज़िन्दगी का भी,
और पंख होते अपनी ज़िन्दगी के भी,
तो पापा मैं ऑफ का बटन दबाती,
और पंखों से आसमाँ में उड़ती जाती।
उड़ते उड़ते मैं आप के पास आ जाती,
ढेर सारी बातें आप से फिर से कर पाती,
बचपन के किस्से कहानियाँ आपसे मैं सुनने पाती,
आपका प्यार और दुलार फिर से पाने पाती।
ऑन का बटन दबाकर वापस धरती पर आ जाती,
और माँ को आपकी ख़ैरियत सुनाती,
आपकी बातें सुनाकर उसे खूब हँसाती,
यूँ उस के दुख को कुछ हल्का कर पाती।
इस दुनिया से जब भी मैं कोई ठोकर खाती,
तो वापस मैं ऑफ का बटन दबाती,
और अपना जी बहलाने एक बार फिर से,
मैं उड़कर आप के पास आ जाती।
