हाय गरीबी
हाय गरीबी
1 min
523
टपका घर
रोता हुआ गरीब
सिकुड़ी रात
बिन मौसम
कड़कती बिजली
हो रही वर्षा
कैसी न वर्षा
अन ना ही उपजा
का भूखा खाए
मांगता भीख
बिछौना पगड़ी का
विपदा हाय
दुख बहुत
गरीब की विपदा
सुनता कौन
कर्म गठरी
हर रंग दिखावे
उसकी माया
चादर मैली
किसका फिर रोना
है फल योग
आस सहारे
भगवन तिहारे
रो रो पुकारे
का पछतावे
समय पाछे फिर
शोक मनावे
करना दया
काम बहुत आवे
पीर फकीर।
