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Navin Madheshiya

Others

3  

Navin Madheshiya

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गर मैं पक्षी होता

गर मैं पक्षी होता

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गर मैं पक्षी होता, उड़ जाता आसमान में

फैला कर अपने पंखों को नाप लेता संसार मैं


गर मैं पक्षी होता, उड़ जाता आसमान में

दूर पहाड़ी के ऊपर बनाता अपना घोंसला मैं


नित सुबह उठकर करता सबको प्रणाम मैं

बातें करता बादलों संग, उड़ता रहता आसमान में


गर मैं पक्षी होता, उड़ जाता आसमान में

बैठ डाली सब आमों की ले लेता स्वाद मैं


फूला सब कलियों को महका देता संसार मैं

गर मैं पक्षी होता, उड़ जाता आसमान में


गर मैं पक्षी होता, उड़ जाता आसमान में

गर मैं पक्षी होता, उड़ जाता आसमान में


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