STORYMIRROR

PRADYUMNA AROTHIYA

Others

4  

PRADYUMNA AROTHIYA

Others

घर छोटे थे

घर छोटे थे

1 min
383

घर छोटे थे

मगर दिल बड़े थे।

तंग थे कमरे

मगर प्यार के 

अहसास में बंधे थे।।


दुःख छोटा था या बड़ा था,

इस बात से परे

दुःख बांटने को

हमदर्द बहुत थे।

जिंदगी के चलन में

हर कदम 

मुस्कुराहट के पल बहुत थे।।


भाषाओं की नमी में

रिश्तों के धागे अटूट बंधे थे।

मौसम बदले,

मगर ग्रीष्म ऋतु के दौर में भी

सम्मान के भाव सधे थे।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन