ग़ज़ल
ग़ज़ल
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सफर के लिए हम निकलते रहेंगे
दुआ माँ की लेकर यूँ चलते रहेंगे
अंजुमन में हैं चाहने वाले मेरे
यहाँ सबसे मोहब्बत करते रहेंगे
बदल कर कभी हर्फ़ तुमको पढ़ेंगे
नए ज़ाविये से हम लिखते रहेंगे
तिज़ारत करें प्यार का सबसे हम भी
ठेकेदार कब तक हम बनते रहेंगे
बना कर ये क्या रख दिया तुमने सबको
गलत बातों पर ही झगड़ते रहेंगे
जलेगी मुहब्बत शमा की हमेशा
चेराग ए मुहब्बत यूँ जलते रहेंगे
रफ़ू कर ले तू भी ग़मो को यूं 'आकिब'
मुहब्बत से घर अपने पलते रहेंगे।
