STORYMIRROR

AKIB JAVED

Others

3  

AKIB JAVED

Others

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
261

सफर के लिए हम निकलते रहेंगे

दुआ माँ की लेकर यूँ चलते रहेंगे


अंजुमन में हैं चाहने वाले मेरे

यहाँ सबसे मोहब्बत करते रहेंगे


बदल कर कभी हर्फ़ तुमको पढ़ेंगे

नए ज़ाविये से हम लिखते रहेंगे


तिज़ारत करें प्यार का सबसे हम भी

ठेकेदार कब तक हम बनते रहेंगे


बना कर ये क्या रख दिया तुमने सबको

गलत बातों पर ही झगड़ते रहेंगे


जलेगी मुहब्बत शमा की हमेशा

चेराग ए मुहब्बत यूँ जलते रहेंगे


रफ़ू कर ले तू भी ग़मो को यूं 'आकिब'

मुहब्बत से घर अपने पलते रहेंगे।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन