समझ गए थे संभल गए थे सुख की नींद को लेना है कुछ लिखना है समझ गए थे संभल गए थे सुख की नींद को लेना है कुछ लिखना है
अगर हमे अपना धर्म चुनने का भी अधिकार होता... अगर हमे अपना धर्म चुनने का भी अधिकार होता...
चलो कुछ लिखें, अपना भी...! चलो कुछ लिखें, अपना भी...!
कहने को कुछ नही था पर समझने को बहुत कुछ था जो शायद कहने से नही समझाया जा सकता था कहने को कुछ नही था पर समझने को बहुत कुछ था जो शायद कहने से नही समझाया जा सकता था
एक बालक की जिज्ञासा है जिसमें वह अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए अपने अबोध मन को समझाने की कोशिश करता है... एक बालक की जिज्ञासा है जिसमें वह अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए अपने अबोध मन को समझ...
वो लड़की और उसकी दुनिया सब 'ख्वाब' ही तो है ! वो लड़की और उसकी दुनिया सब 'ख्वाब' ही तो है !