STORYMIRROR

Manthan Rastogi

Others

1  

Manthan Rastogi

Others

एक मुहब्बत बरगद सी

एक मुहब्बत बरगद सी

1 min
321

रहता है ज्यों का त्यों ही

और छाँव देता बरगद

इतना विशालकाय भी

जड़त्वीय है बरगद

और बरगदो के जैसी

है माँ बाप की कवायद

वो ढाल हैं हमारी

शाफ़ी है वो मुहब्बत ।


कितने ही प्रेम रस में 

पाला गया है हमको

अदब सी ही सरस में 

ढाला गया है हमको

जब जब घटा गलत कुछ 

या हमने खतायें की हैं 

हर बार तसल्ली से

सँभाला गया है हमको।


हर बार निकाला है

हमको मुसीबतो से

झेली हंसी खुशी है

उन दोनों ने क़यामत 

बस दूर हूँ अभी मैं 

पर कम नहीं है चाहत

वो ढाल हैं हमारी 

शाफ़ी है वो मुहब्बत 

माँ बाप की मुहब्बत 

माँ बाप की मुहब्बत ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन