STORYMIRROR

RASHI SRIVASTAVA

Others

2  

RASHI SRIVASTAVA

Others

एक बुरा ख्वाब

एक बुरा ख्वाब

1 min
154

मोड़ के मुंह वो गया था जब

दिल मेरा तोड़ गया था तब,

अपने बिखरे टुकड़ों को अब

खुद ही समेट रही हूं मैं,

मन में ठान लिया है कि

खुद पे तरस ना खाऊंगी,

एक बुरा सा ख्वाब समझ के,

उसको भुला रही हूं मैं

पीछे ना भागूंगी किसी के,

लक्ष्य मैं अपना खोजूंगी

सफल बनाने को जीवन का,

अर्थ तलाश रही हूं मैं II



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन