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मधुशिल्पी Shilpi Saxena

Others

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मधुशिल्पी Shilpi Saxena

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एक बार फिर से!

एक बार फिर से!

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भूलकर सारे गिले शिकवे

एक बार फिर से मुस्कुरा दो न,

कुछ नहीं रखा नफ़रतों में

एक बार फिर से गले लगा लो न,

मिलकर मनाएंगे दीवाली और ईद

एक बार फिर से होली का गुलाल उड़ा दो न,

मिलकर माँगेंगे खुशियों की दुआ,

एक बार फिर से मंदिर की घंटी

और अज़ान मिला दो न।


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