STORYMIRROR

Ankita Singh

Others

1  

Ankita Singh

Others

दोस्ती

दोस्ती

1 min
207


क्या नाम दूँ इस ज़माने की

दोस्ती को कभी हँसाती तो

कभी हँसी ही मिटा देती है...।।


अब क्या नाम दूँ इसको..???


आज कल की दोस्ती पैसे

से मजबूत होती है

दिल तो खिलौना है

एक साथ पल गुज़ारना

तो बहाना है...।।


अपनी प्रिय, को कभी

बदलते देखा है।

मुस्कुुुराते हुए खेल

खेलते देखा है।।

अब क्या नाम दूँ इसको..???




विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Ankita Singh