दोहे
दोहे
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बेटी होती है परी, बेटी रखती मान।
घर में उजियारा करे, सबका है सम्मान।।
कागा और कोयल हैं, दोनों का रंग भाय।
मीठे सुर लगते भले, कटु सुर सहा न जाय।।
ममता का सागर रहे, दुख में भी मुस्काय।
सबके सपनों में सदा, अपने सपन सजाए।।
प्रीत भरोसा जब रहे, घर संगम बन जाए।
छल प्रपंच से दूर हो, सुख-शांति मिल पाए।।
नयन वाचाल बन रहें, होंठ जब भेद छुपाए
मन चाहे क्या कहना, उन तक जा पहुँचाए।
बुरा समय न रहे सदा, मन काहे घबराय।
धैर्य कभी न छोडिये,विपदा कैसी आय।।
