दो रंग..
दो रंग..
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जीवन के दो रंग ऐसे,
इश्क़ और गुलाब जैसे।
इश्क़ ख़ुशबू में हो फना ऐसे,
दो बिछड़ों में हो न दूरी जैसे।
ख़ुशबू इश्क़ में घुलता जाता,
रस जीवन में भरता जाता।
ये अद्भुत जीवन का एहसास,
पल पल तुमको लाता पास।
रंगता ख़ुद या मुझे रंग जाता,
छूने का एहसास तो लाता।
है रंग ये मिलन का,
दो बिछड़ों के जीवन का।
