दो दिल मिले
दो दिल मिले
दो दिल जब आपस में मिले
चार पग तब साथ-साथ चले।
थाम के एक दूजे का हाथ
चल पड़े जीवन पथ पर साथ।
चलना है अंजान डगर
लगे बड़ा सुहाना सफर।
मिले जब स्वजनों का प्यार
मन में भरे विश्वास अपार।
देवों का भी आशीष मिले
नया संसार फूलों सा खिले।
हट जाऐं राह के हर कंटक
प्यार का रंग जब हो चटक।
चाँद-तारे अग्नि को साक्षी मान
अचल अहिवात का ले वरदान।
वेद ऋचाओं को पढ़ते
पाहन, कुँआ, वृक्ष, पूजते।
लेते सात फेरे, दे सात वचन
ये ही है वैदिक रीति चलन।
एक अनोखा संसार बनाएँ
जिनमें दो कुल का प्यार समाएँ
तन मन मिल बढ़ें जीवन पथ पर
कुछ करें अनोखा प्यार निभा कर।।
वैदिक रीति से पति-पत्नी बन आगे बढ़ने की गाथा।
