STORYMIRROR

दिल की आवाज

दिल की आवाज

1 min
420


लहरें तो किनारे पे आती है

मध्य में नहीं सहज भाव की दरिया में तैरो आनन्द वहीं ।।

आँसुओं को संभलना प्रीतम् के लिए

दूसरों के लिए नहीं आँसू पोछने वाला बस वही तो है दुसरा न है कोई ।।

आँसुओं के मोतियाँ तो उसे पसन्द है

पैसों के लड्डु नहीं सच्चे प्रेमियों तो बस उसे ढूंढते हैं किसी गुड्डू को नहीं ।।


Rate this content
Log in